शिमला, 17 मार्च। राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की मांग को संसद में पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य के केवल कुछ ही जिलों—जिला सोलन के बद्दी, नालागढ़, जिला सिरमौर के कालाअंब और जिला ऊना के गगरेट व संतोषगढ़—में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इससे प्रदेश के अन्य जिलों के लोगों को औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों से वंचित रहना पड़ रहा है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने सदन को जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में लगभग 350 बड़ी एवं मध्यम और 30,000 से अधिक लघु औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें लगभग दो लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। हालांकि, यह अवसर मुख्य रूप से कुछ ही जिलों तक सीमित हैं, जिससे बाकी जिलों के युवाओं को मजबूरी में या तो पारंपरिक कृषि और बागवानी पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर छोटे-मोटे रोजगार से जीवनयापन करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकतर युवा रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पढ़ाई पूरी करने के बाद दूसरे राज्यों का रुख करने को विवश हैं। यदि राज्य के मध्य और ऊपरी इलाकों में भी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाती है, तो इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकेगा। साथ ही, यह प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा।
सांसद ने सरकार से मांग की कि जिस तरह सोलन, ऊना और सिरमौर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया गया है, उसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों की स्थापना की जाए। इससे जहां एक ओर प्रदेश का समग्र विकास होगा, वहीं लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश न केवल पर्यटन और कृषि के लिए जाना जाता है, बल्कि उद्योगों के लिए भी एक संभावनाओं वाला राज्य है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस नीति बनाकर कदम उठाती है, तो इससे प्रदेश के विकास को एक नई गति मिलेगी और हिमाचल देश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।