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हिमाचल में यू-टर्न की राजनीति, मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल : सिकंदर कुमार

Himgiri Samachar:

शिमला, 24 अप्रैल। भाजपा के प्रदेश महामंत्री और सांसद सिकंदर कुमार ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के फैसलों में बार-बार बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को लेकर पलटू जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो सरकार की छवि को प्रभावित कर रहे हैं।

 

सिकंदर कुमार ने शुक्रवार को कहा कि हाल के समय में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कई फैसले पहले लागू किए गए और फिर जनविरोध के बाद वापस ले लिए गए। उनके अनुसार इस तरह की स्थिति से यह संदेश जाता है कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी के निर्णय ले रही है और बाद में दबाव में आकर उन्हें बदल रही है। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बनती है और जनता में भरोसे पर असर पड़ता है।

 

उन्होंने कुछ उदाहरण भी गिनाए, जिनमें कथित समोसा विवाद और उससे जुड़ी जांच, शहरी क्षेत्रों में शौचालय शुल्क लगाने का फैसला, 125 यूनिट मुफ्त बिजली से जुड़ी योजना में बदलाव की चर्चा, और कर्मचारियों के वेतन-पेंशन की तारीखों में प्रस्तावित परिवर्तन शामिल हैं। सिकंदर कुमार के अनुसार, इन मामलों में सरकार को विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचने पड़े। हाल ही में हिमाचल भवन दिल्ली, हिमाचल भवन चंडीगढ़ और शिमला के सर्किट हाउस के कमरों के किराए बढ़ाने का निर्णय भी विरोध के बाद वापस लेने का उदाहरण बताया गया।

 

हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार और उसके समर्थकों का नजरिया अलग बताया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार जनता की प्रतिक्रिया सुनकर अपने फैसलों में बदलाव करती है, तो इसे संवेदनशील नेतृत्व के रूप में भी देखा जा सकता है। लेकिन सिकंदर कुमार का मानना है कि बार-बार फैसले बदलना नेतृत्व की कमजोर पकड़ को दर्शाता है और इससे सरकार की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि मुख्यमंत्री तक सही फीडबैक नहीं पहुंच रहा है, जिसके कारण सरकार को कई बार सार्वजनिक रूप से असहज स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

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