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हिमाचल के दो पूर्व मुख्य सचिव आमने-सामने, सेवानिवृत्त आईएएस श्रीकांत बाल्दी पर एफआईआर

Himgiri Samachar:
शिमला, 05 जून। हिमाचल प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय तक शीर्ष पदों पर रहे दो पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बीच विवाद अब पुलिस थाने तक पहुंच गया है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व रेरा अध्यक्ष रहे रिटायर आईएएस अधिकारी श्रीकांत बाल्दी के खिलाफ शिमला में एफआईआर दर्ज हुई है। यह मामला उस शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है जो हिमाचल के पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पुलिस को दी थी। दिलचस्प बात यह है कि संजय गुप्ता स्वयं भी हाल ही में मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उनकी शिकायत पर अब पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।


पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार छोटा शिमला थाने में 30 मई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 248, 351 और 356(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि श्रीकांत बाल्दी ने एक बयान जारी कर संजय गुप्ता के खिलाफ झूठे, दुर्भावनापूर्ण और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप लगाए, जिन्हें बाद में विभिन्न मीडिया मंचों पर प्रसारित किया गया।


दोनों रहे हैं हिमाचल के मुख्य सचिव, अब विवाद पुलिस तक पहुंचा


यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें राज्य के दो पूर्व मुख्य सचिव आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। श्रीकांत बाल्दी वर्ष 2019 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव रहे थे। 1985 बैच के आईएएस अधिकारी बाल्दी मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्ति के बाद हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। वह दिसंबर 2024 तक इस पद पर रहे।


दूसरी ओर, 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता पिछले महीने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति को अभी छह दिन ही हुए थे कि उनकी शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज हो गई। वर्तमान में संजय गुप्ता पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।


एफआईआर में संजय गुप्ता ने आरोप लगाया है कि श्रीकांत बाल्दी ने एक बयान जारी कर उन्हें अवैध आदेश पारित करने वाला अधिकारी बताया, उन पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लेने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। शिकायत के अनुसार इन आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और इन्हें जानबूझकर उनकी छवि खराब करने के लिए सार्वजनिक किया गया।


‘संदिग्ध ईमानदारी’ वाली टिप्पणी पर सबसे ज्यादा आपत्ति


एफआईआर में जिस टिप्पणी को सबसे गंभीर बताया गया है, वह संजय गुप्ता की ईमानदारी को लेकर की गई कथित टिप्पणी है। शिकायत के अनुसार श्रीकांत बाल्दी ने अपने बयान में कहा था कि संजय गुप्ता अपने पूरे सेवा काल में “संदिग्ध ईमानदारी” वाले अधिकारी रहे हैं। संजय गुप्ता ने इसे पूरी तरह झूठा, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा है कि उन्हें राज्य सरकार की ओर से विजिलेंस क्लीयरेंस और इंटीग्रिटी सर्टिफिकेट प्राप्त रहे हैं तथा वे सचिव, प्रधान सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्य सचिव जैसे पदों पर पदोन्नत होते हुए पहुंचे हैं।


शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रेस बयान में यह धारणा बनाने की कोशिश की गई कि उन्होंने चेस्टर हिल परियोजना के पक्ष में काम किया। संजय गुप्ता का कहना है कि इससे जनता के बीच यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि उनके फैसले निष्पक्ष नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस तरह की बातें उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, प्रशासनिक विश्वसनीयता और सरकारी संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कही गईं।


रेरा कार्यकाल और चेस्टर परियोजनाओं का भी जिक्र, पुलिस जांच शुरू


एफआईआर में केवल प्रेस बयान का ही जिक्र नहीं है बल्कि रेरा से जुड़े कुछ फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार श्रीकांत बाल्दी ने अपने रेरा अध्यक्ष कार्यकाल में चेस्टर-2 और चेस्टर-4 परियोजनाओं सहित कुछ संयुक्त विकास समझौतों (जेडीए) को मंजूरी दी थी। संजय गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रेस बयान में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया और एकतरफा तरीके से उनके खिलाफ आरोप लगाए गए।


शिमला पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 248, 351 और 356(2) के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपों के माध्यम से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, झूठे आरोप लगाने और सार्वजनिक रूप से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। संजय गुप्ता ने पुलिस से प्रेस बयान, समाचार प्रकाशनों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखने, पूर्व रेरा अध्यक्ष के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई करने तथा मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच करने का आग्रह किया है।



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