शिमला, 26 अगस्त। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि प्रदेश के 147 सीबीएसई स्कूलों में 30 सितंबर तक शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीएसई शिक्षकों की नौकरी को लेकर भविष्य में गंभीरता से विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का जोर सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों की संख्या बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच साल में प्रदेश के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।
मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में सीबीएसई स्कूलों और उनमें शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों के पदों का परिणाम आने के तुरंत बाद उनकी पोस्टिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता के मानक तय किए गए हैं और चयन में मेरिट 80 प्रतिशत तक रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 147 सीबीएसई स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने के लिए 80 करोड़ रुपये की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ेगी। उन्होंने बताया कि 147 स्कूलों में सीबीएसई व्यवस्था लागू करने के बाद दूसरे चरण में अन्य स्कूलों को भी इस व्यवस्था में लाने पर विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों के लिए केंद्र सरकार से कोई पैसा नहीं मिला है। इन स्कूलों की फंडिंग हिमाचल प्रदेश सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई शिक्षकों की नौकरी के संबंध में सरकार आने वाले समय में गंभीरता से विचार करेगी।
मुख्यमंत्री ने सीबीएसई स्कूल शुरू करने के पीछे सरकार की सोच बताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होंने कहा कि वह एक स्कूल में गए थे, जहां एक ओर कान्वेंट स्कूल और दूसरी ओर सरकारी स्कूल था। कान्वेंट स्कूल में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई हो रही थी। इसी अंतर को देखते हुए सरकार ने सीबीएसई व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में 24 हजार बच्चों की संख्या बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी शिक्षा नीति पर काम कर रही है, जिससे हिमाचल से पढ़कर निकलने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दी है और इसी आधार पर शिक्षकों की योग्यता के मानक तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रणधीर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र में भी एक सीबीएसई स्कूल खोला जाएगा।
इससे पहले शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सीबीएसई शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि 147 स्कूलों के लिए 6 हजार से अधिक पद स्वीकृत हैं। फिलहाल इन शिक्षकों की नियुक्ति स्कीम आधारित व्यवस्था के तहत होगी और उन्हें 30 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों को दो साल बाद नियमित करने का फिलहाल कोई फैसला नहीं है। नियमितीकरण के संबंध में भविष्य में सकारात्मक सोच के साथ विचार किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि कंप्यूटर शिक्षकों को भी सीबीएसई स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में 147 स्कूलों को पूरी तरह क्रियाशील किया जाएगा। इन स्कूलों में 3,830 शिक्षक उपलब्ध हैं और 2183 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि खाली पद भी एक महीने में चयन आयोग के माध्यम से भर दिए जाएंगे।
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सीबीएसई शिक्षकों को 10 महीने का वेतन दिए जाने के प्रावधान पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या इन शिक्षकों को भी 12 महीने का वेतन दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति और भविष्य में उनके नियमितीकरण को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि सीबीएसई पैटर्न पर चल रहे स्कूलों में सभी जरूरी मानक पूरे होने चाहिए। उन्होंने भरमौर में सीबीएसई स्कूल खोले जाने का मुद्दा उठाया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 147 स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के लिए निर्धारित मापदंड पूरे किए गए हैं। जहां कुछ कमियां रह गई हैं, उन्हें भी पूरा किया जाएगा।
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने 147 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर लाने के आधार और स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षा ब्लॉकों में सीबीएसई पैटर्न का कोई स्कूल नहीं है। उन्होंने पूछा कि इन स्कूलों के चयन में विधायकों की राय क्यों नहीं ली गई और क्या भविष्य में नए स्कूलों को भी सीबीएसई से जोड़ा जाएगा।
भाजपा विधायक विपिन परमार ने सीबीएसई स्कूलों की संख्या बढ़ाने और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पर इसके असर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की घोषणा की है। उन्होंने पूछा कि स्कूल शिक्षा बोर्ड को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई कैसे होगी। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों के लिए फंडिंग और सीबीएसई में जाने के बाद बच्चों के स्कूल छोड़ने से जुड़े सवाल भी उठाए।
शिक्षा मंत्री ने जवाब में कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है और इसी स्थिति को देखते हुए सीबीएसई स्कूल शुरू करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 1,988 स्कूल हैं। सरकार का ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता पर है। उन्होंने कहा कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे में हिमाचल 28 राज्यों में तीसरे स्थान पर रहा है और प्रदेश में साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीएसई व्यवस्था शुरू करने का मकसद सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 147 स्कूलों के बाद 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला लिया है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रदेश की स्कूल शिक्षा को और बेहतर बनाना है।