शिमला, 06 सितंबर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता बनी हुई है और कई हिस्सों में बीते 24 घण्टों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। बारिश के साथ भूस्खलन की घटनाओं से राज्य में 78 सड़कें अवरुद्ध हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार रविवार शाम तक 12 बिजली ट्रांसफार्मर और आठ पेयजल योजनाएं भी प्रभावित थीं। शिमला में दिन भर बादल छाए रहे।
मौसम विभाग ने 12 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की संभावना जताई है। हालांकि इस अवधि में भारी बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सात से 10 सितंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 11 और 12 सितंबर को भी मौसम के आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। इन सभी दिनों में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है।
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। नाहन में सबसे अधिक 53.6 मिलीमीटर बारिश हुई। बिलासपुर के नैना देवी में 46.2 मिलीमीटर, मंडी के जोगिंदरनगर में 39 मिलीमीटर, शिमला के सराहन में 30.1 मिलीमीटर, सिरमौर के धौलाकुआं एडब्ल्यूएस में 26.5 मिलीमीटर और सिरमौर के जटोन बैराज में 24 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला के चौपाल में 23 मिलीमीटर, सोलन के कसौली में 23 मिलीमीटर और किन्नौर के वांगतू में 20.4 मिलीमीटर बारिश हुई। शिमला, जुब्बड़हट्टी, कांगड़ा, सुंदरनगर और मुरारी देवी में गरज के साथ बारिश की स्थिति दर्ज की गई।
बारिश के कारण सबसे अधिक सड़कें मंडी जिले के सराज उपमंडल में प्रभावित हुई हैं, जहां 29 सड़कें बंद हैं। मंडी के सरकाघाट में तीन, थलौट में दो तथा सुंदरनगर और करसोग में एक-एक सड़क अवरुद्ध है। कुल्लू जिले के आनी में 12, निरमंड में चार, कुल्लू उपमंडल में चार और बंजार में दो सड़कें बंद हैं। शिमला जिले में दो सड़कें अवरुद्ध है।
इसके अलावा कांगड़ा जिले में सात, सिरमौर में पांच, ऊना में तीन, सोलन में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है।
बिजली आपूर्ति पर भी बारिश और भूस्खलन का असर पड़ा है। कुल्लू के निरमंड में 10 और शिमला के रामपुर में दो बिजली ट्रांसफार्मर खराब है। पेयजल आपूर्ति से जुड़ी आठ योजनाएं भी प्रभावित हैं। इनमें शिमला के रामपुर की पांच और चंबा के भटियात की दो पेयजल योजनाएं शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा मानसून सीजन में बारिश और इससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 274 लोगों की मौत हुई है, जबकि 493 लोग घायल हुए हैं। तीन लोग अभी लापता हैं। मृतकों में 164 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है। इसके अलावा 110 लोगों की मौत भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, पानी में बहने, फिसलने, पहाड़ी से गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में हुई है।
मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं में 467 मवेशियों की भी मौत हुई है। प्रदेश में 122 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं और 488 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इस दौरान 17 दुकानें और 460 पशुशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
सरकारी आकलन के मुताबिक मानसून के दौरान प्रदेश में अब तक करीब 1,242 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें लोक निर्माण विभाग को हुआ करीब 951 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।