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शिमला : सचिवालय के बाहर आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन, वेतन बढ़ोतरी और कर्मचारी दर्जे की मांग

Himgiri Samachar:
शिमला, 08 जून। राजधानी शिमला में सोमवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी एक दिवसीय हड़ताल की। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) के आह्वान पर प्रदेश भर से बड़ी तादाद में आंगनबाड़ी कर्मी शिमला पहुंचे और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पहले टालैंड में एकत्र हुए और फिर जुलूस के रूप में सचिवालय तक पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।


आंगनबाड़ी कर्मियों की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाना, सेवानिवृत्ति लाभ देना, न्यूनतम वेतन लागू करना और आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स को क्रमशः क्लास-3 और क्लास-4 कर्मचारियों का दर्जा देना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने पंजाब की तर्ज पर अवकाश सुविधा, स्पेशल मेडिकल लीव, ईएसआई और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की भी मांग उठाई।


प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की राष्ट्रीय महासचिव ऊषा रानी ने कहा कि प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्री-स्कूल शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के साथ-साथ सरकार द्वारा सौंपे जाने वाले कई अतिरिक्त दायित्व भी निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में इतनी राशि में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ताओं को मोबाइल फोन खुद खरीदने पड़ते हैं और रिचार्ज के लिए मिलने वाली राशि भी पर्याप्त नहीं है।


प्रदर्शन के दौरान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल  से मुलाकात कर मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। बैठक में मंत्री ने कई मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी का लाभ देने की दिशा में सरकार कार्रवाई करेगी। साथ ही मोबाइल रिचार्ज के लिए दी जाने वाली राशि को 2000 रुपये वार्षिक से बढ़ाकर 4000 रुपये वार्षिक करने पर सहमति व्यक्त की गई।


मंत्री ने आंगनबाड़ी कर्मियों को नए स्मार्ट फोन उपलब्ध करवाने के लिए एक समिति गठित करने का भी आश्वासन दिया, जिसमें यूनियन का प्रतिनिधित्व भी होगा। मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर भी सकारात्मक चर्चा हुई और सरकार ने इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया।


बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर होने वाले खर्चों, जैसे ईंधन, सब्जी, बिजली और सामग्री ढुलाई के बिलों का भुगतान नियमित रूप से हर महीने करने का आश्वासन भी दिया गया। इसके अलावा ईपीएफ, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों पर आगे चर्चा करने पर सहमति बनी। ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजा देने के विषय पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया।


यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 11 जुलाई को पूरे प्रदेश में काला दिवस मनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने सरकार की ओर से मिले आश्वासनों का स्वागत करते हुए कहा कि अब उनकी निगाहें इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेंगी। मंत्री और यूनियन के बीच आगे की चर्चा के लिए 20 और 21 जुलाई को बैठक आयोजित करने पर भी सहमति बनी है।

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