शिमला, 07 सितंबर। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (पीएमएफएमई) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिमला जिले को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित पीएमएफएमई कान्क्लेव 2026 के दौरान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दिया गया। हिमाचल प्रदेश में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला नोडल अधिकारी संजय कंवर ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।
उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने इस उपलब्धि पर जिला की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पीएमएफएमई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में अधिकारियों और कर्मचारियों की समर्पित सेवा और योगदान का यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमियों को योजना का लाभ पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।
जिला स्तरीय समिति की उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा भी की गई। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार शिमला जिले में वर्ष 2021 से अब तक पीएमएफएमई योजना के तहत कुल 3,297 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 3,185 आवेदन बैंकों को ऋण स्वीकृति के लिए अनुशंसित किए गए हैं। प्राप्त आवेदनों में से 2,210 मामलों में ऋण स्वीकृत हो चुका है, जबकि 130 आवेदन ऋण प्रक्रिया में हैं। वहीं, 67 आवेदन अनुशंसित नहीं किए गए और 748 आवेदन बैंकों की ओर से अस्वीकृत किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 5 सितंबर 2026 तक जिला उद्योग केंद्र, शिमला की ओर से 284 नए मामलों को विभिन्न बैंकों के पास ऋण स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इन मामलों को स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय और संस्थागत सहायता देकर मजबूत करना है। इसके माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पीएमएफएमई केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत देशभर में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और संस्थागत सहायता दी जाती है। योजना में छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को बैंक ऋण से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता तथा ब्रांडिंग और विपणन में सहयोग दिया जाता है। इसके तहत निर्धारित सीमा तक 35 प्रतिशत क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान है।
योजना में स्थानीय कृषि और खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जिला एक उत्पाद’ पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य स्वरोजगार और रोजगार के अवसर बढ़ाना, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना, उद्यमियों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी संस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया जाता है।