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पीटीए फंड के दुरूपयोग का आरोप, एसएफआई ने मांगी जांच

Himgiri Samachar:
शिमला, 16 जून। छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में पीटीए (पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन) फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को एसएफआई शिमला जिला कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपकर पीटीए फीस के नाम पर छात्रों से की जा रही वसूली और उसके कथित दुरुपयोग की जांच की मांग की।


एसएफआई ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों से पीटीए फंड के नाम पर लाखों रुपये एकत्रित किए जा रहे हैं, लेकिन इस राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता नहीं है। संगठन ने कहा कि इसका ताजा उदाहरण राजकीय उत्कृष्टता महाविद्यालय संजौली में सामने आया है, जहां शैक्षणिक सत्र 2022-23 के दौरान पीटीए फंड के रूप में 19 लाख रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की गई। एसएफआई का आरोप है कि इस राशि को भवनों के नवीनीकरण, मरम्मत और कॉलेज के लिए एक संगीतमय एंथम तैयार करने जैसे कार्यों पर खर्च किया गया।


संगठन ने राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा का भी उल्लेख किया। एसएफआई के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2021-22 में वहां छात्रों से पीटीए फीस के रूप में 21 लाख रुपये से अधिक राशि एकत्रित की गई थी। आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगे जाने पर प्रशासन के पास खर्च का स्पष्ट और औपचारिक विवरण उपलब्ध नहीं था। एसएफआई का कहना है कि ऐसे मामलों से यह आशंका पैदा होती है कि प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पीटीए फंड के उपयोग को लेकर पर्याप्त निगरानी और स्पष्ट नियम नहीं हैं।


ज्ञापन में संगठन ने कहा कि "अनुदान सहायता टू पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन नियम, 2006" में पीटीए की पात्रता, अनुदान और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सहायता संबंधी प्रावधान तो हैं, लेकिन फंड के अन्य उपयोगों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। एसएफआई का तर्क है कि इसी वजह से फंड के दुरुपयोग और अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है।


संगठन ने अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक से पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें पीटीए फंड के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना, कथित अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित करना, प्रदेशभर में पीटीए फंड की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय करना, फंड के उपयोग संबंधी स्पष्ट नियम बनाना और वर्ष 2025 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करना शामिल है।


एसएफआई शिमला जिला सचिव पवन कुमार ने कहा कि अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक ने संगठन की मांगों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए तो जुलाई के पहले सप्ताह से प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। एसएफआई का कहना है कि छात्रों से लिए जाने वाले प्रत्येक रुपये का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और पीटीए फंड के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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