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हिमाचल में भूस्खलन से 914 सड़कें बंद, अगले दो दिन बहुत भारी वर्षा का ओरेंज अलर्ट

Himgiri Samachar:

शिमला, 29 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी वर्षा ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई जिलों में सड़क, बिजली, पेयजल और संचार आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। जगह-जगह भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है और राज्यभर में 900 से ज्यादा सड़कें बंद हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा का ओरेंज अलर्ट जारी किया है।

 

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक दो नेशनल हाइवे और 914 सड़कें बंद रहीं। साथ ही 925 बिजली ट्रांसफार्मर और 266 पेयजल योजनाएं ठप हो गईं। चंबा जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा जहां 265 सड़कें अवरुद्ध हैं। मंडी में 222, कुल्लू में 160, सिरमौर में 96 और कांगड़ा में 60 सड़कें बंद रही। चंबा जिले में 395 ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं। पांगी और भरमौर क्षेत्र में संचार व्यवस्था ठप होने के कारण वहां की वास्तविक स्थिति का ब्यौरा उपलब्ध नहीं हो पाया है। कुल्लू में 237, मंडी में 203 और लाहौल स्पीति में 42 ट्रांसफार्मर बंद हैं। वहीं चंबा जिले में 121, मंडी में 72 और कुल्लू व शिमला में 35-35 पेयजल स्कीमें प्रभावित हुई हैं।

 

बीते 24 घंटों में सिरमौर जिले के जतौन बैरेज में सर्वाधिक 140 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पालमपुर में 91, भरवाई में 80, संधोल में 77, पांवटा साहिब में 75, कसौली में 62, नाहन में 60, सोलन में 57, गोहर में 55, बिलासपुर में 50 मिमी और शिमला में शुक्रवार शाम भारी वर्षा हुई।

 

मौसम विभाग ने 30 और 31 अगस्त को भारी से बहुत भारी वर्षा का ओरेंज अलर्ट जारी किया है। 1 और 2 सितंबर को येलो अलर्ट रहेगा जबकि 3 और 4 सितंबर को भी मौसम खराब रहने की संभावना है, हालांकि कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। जिलावार पूर्वानुमान के अनुसार 30 अगस्त को चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि 31 अगस्त को उना, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में भारी वर्षा का ओरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

 

इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में 317 लोगों की मौत हो चुकी है, 40 लापता हैं और 374 लोग घायल हुए हैं। मंडी में 51, कांगड़ा में 49, चंबा में 36, शिमला और किन्नौर में 28-28, कुल्लू में 26 मौतें दर्ज हुई हैं। अब तक 3,889 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें 795 पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। 466 दुकानें और 3,486 पशुशालाएं नष्ट हुई हैं। 1,865 पालतू पशु और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत हुई है। अनुमानित नुकसान 2,774 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।

 

राज्य में इस मानसून में 90 फ्लैश फ्लड, 87 भूस्खलन और 42 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। लाहौल-स्पीति में 52 फ्लैश फ्लड, कुल्लू में 15, शिमला में 14 और मंडी में 12 भूस्खलन की घटनाएं हुईं। मंडी जिले में 18 बार बादल फटे हैं।

 

इसी बीच जनजातीय जिला किन्नौर के पूह उपमंडल के लिप्पा गांव में तड़के बादल फटने से बोगली नाले में आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया। दो मजदूर इसमें फंस गए जिन्हें स्थानीय लोगों ने बचाकर रिकांगपिओ अस्पताल में भर्ती कराया। घटना से गांव की उपजाऊ भूमि को भी भारी क्षति हुई है।

 

कुल्लू और चंबा में भारी बारिश से हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। चंबा के भरमौर क्षेत्र में सड़कें टूटने से हजारों मणिमहेश यात्री फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बचाव कार्य में जुटे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मणिमहेश यात्रा में फंसे यात्रियों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 9816698166, 01899-226950, 226951, 226952 और 226953 जारी किए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1070 और शिमला आपदा प्रबंधन केंद्र के दूरभाष नंबर 0177-2629688, 2629939, 2629439 और 2628940 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

 

कुल्लू जिले के आनी उपमंडल की ग्राम पंचायत कराड के नई तोड़ (पटारना) गांव में भूस्खलन से दो मकान दब गए। इस हादसे में दो महिलाओं शारदा देवी (50) पत्नी जय सिंह और लीलू देवी (45) पत्नी कृष्ण चंद के मलबे में दबने या बह जाने की आशंका है। पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

 

कुल्लू जिले के छनोट नाले के सैलाब में एक कार बह गई, जबकि औट-लुहरी नेशनल हाईवे 305 कई दिनों से भूस्खलन के कारण बंद है। जिले के कुल्लू, मनाली और बंजार उपमंडल में शनिवार को सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया है।

 

सिरमौर जिले में भी बीती रात मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए और जनजीवन प्रभावित हुआ।

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