शिमला, 17 मई। शिमला जिला के शहरी निकाय चुनावों में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। जिला की दो नगर परिषदों रामपुर और ठियोग तथा छह नगर पंचायतों के चुनाव परिणामों में कई जगह राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आए। सबसे ज्यादा चर्चा रामपुर और कोटखाई के नतीजों की रही, जहां भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं चौपाल में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने बढ़त बनाई। ठियोग में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी पर छूटा।
दशकों से कांग्रेस का मजबूत क्षेत्र माने जाने वाले रामपुर में इस बार भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने पहली बार बढ़त हासिल की। नौ वार्डों वाली नगर परिषद रामपुर में भाजपा समर्थित पांच उम्मीदवार जीते, जबकि कांग्रेस समर्थित तीन प्रत्याशी विजयी रहे। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। परिणाम आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।
रामपुर में वार्ड नंबर एक से कांग्रेस समर्थित दीपना नेगी, वार्ड नंबर दो से भाजपा समर्थित रोहित नेगी, वार्ड नंबर तीन से कांग्रेस समर्थित जय श्री, वार्ड नंबर चार से कांग्रेस समर्थित करण शर्मा, वार्ड नंबर पांच से भाजपा समर्थित नितिका गुप्ता, वार्ड नंबर छह से भाजपा समर्थित उमा देवी, वार्ड नंबर सात से भाजपा समर्थित सुंदर लाल, वार्ड नंबर आठ से भाजपा समर्थित चंद्रप्रभा और वार्ड नंबर नौ से विशेषर लाल विजयी रहे।
नगर पंचायत कोटखाई में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। सात सीटों में से पांच पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीते, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को दो सीटों पर जीत मिली। कोटखाई शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का गृह क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यहां के नतीजों को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि जुब्बल में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा और उनके ज्यादातर उम्मीदवार जीते।
वहीं नगर पंचायत चौपाल में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को यहां दो सीटें मिलीं। नगर पंचायत चिड़गांव में कांग्रेस समर्थित चार उम्मीदवार जीते, जबकि भाजपा समर्थित एक प्रत्याशी और दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
नगर परिषद ठियोग में भाजपा और कांग्रेस दोनों के तीन-तीन प्रत्याशी जीते हैं, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। ठियोग कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर का क्षेत्र माना जाता है और यहां मुकाबला बराबरी पर रहने से दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा साफ दिखाई दी।
नगर पंचायत नेरवा में चार वार्ड पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। बाकी तीन वार्डों में एक भाजपा समर्थित और दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।