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शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पद भाजपा की झोली में, कांग्रेस को झटका

Himgiri Samachar:

शिमला, 10 सितंबर। शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा ने कब्जा कर कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। करीब साढ़े तीन महीने से लंबित चुनाव में भाजपा उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित निर्दलीय सदस्य भरत सिंह कलांटा ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद के चुनाव में भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13, कांग्रेस उम्मीदवार को 10 मत मिले और दो मत निरस्त हुए। उपाध्यक्ष पद पर भरत सिंह कलांटा को 14, कांग्रेस उम्मीदवार को 10 मत मिले और एक मत निरस्त हुआ। इस तरह 25 सदस्यीय जिला परिषद में दोनों प्रमुख पद भाजपा के खाते में चले गए।

 

तीन मंत्री और चार विधायक, फिर भी कांग्रेस चारों खाने चित

 

शिमला जिला को लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। मौजूदा समय में जिले से कांग्रेस के तीन कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह, अनिरुद्ध सिंह और रोहित ठाकुर तथा इन्हें मिलाकर सात विधायक हैं। इसके बावजूद जिला परिषद के दोनों शीर्ष पदों पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार नहीं जिता सकी। खास बात यह है कि पिछली बार जिला परिषद अध्यक्ष का पद कांग्रेस की झोली में था। इस बार भाजपा ने न केवल अध्यक्ष पद हासिल किया, बल्कि उपाध्यक्ष पद पर भी अपना समर्थित उम्मीदवार जिताकर जिला परिषद में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।

 

102 दिन बाद हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ चुनाव

 

जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव लंबे समय से अटके हुए थे। जिला परिषद के चुनाव परिणाम 31 मई और 1 जून को घोषित हुए थे, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर खींचतान बनी रही। इससे पहले अगस्त के पहले सप्ताह में बुलाई गई बैठक में भाजपा और कांग्रेस के सदस्य शामिल नहीं हुए थे और चुनाव नहीं हो सके थे। चुनाव टाले जाने का मामला प्रदेश हाईकोर्ट भी पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को बचत भवन में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई। 25 सदस्यीय जिला परिषद में अध्यक्ष पद के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी था और भाजपा उम्मीदवार ने ठीक 13 मत हासिल कर यह आंकड़ा पूरा कर लिया।

 

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को राहत, कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

 

जिला परिषद के दोनों प्रमुख पदों पर भाजपा की जीत को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए राजनीतिक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। शिमला जिले में तीन कदावर मंत्रियों व चार कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी के बावजूद जिला परिषद की कमान भाजपा के हाथ में जाना सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अध्यक्ष पद पर 13-10 और उपाध्यक्ष पद पर 14-10 के अंतर से आए नतीजों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि निर्णायक समर्थन हासिल करने में भाजपा कांग्रेस से आगे रही। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय सदस्य भरत कलांटा को भाजपा का समर्थन मिलना भी चुनाव का अहम पहलू रहा। लंबे इंतजार के बाद आए इन नतीजों ने शिमला की जिला राजनीति में भाजपा को बढ़त और कांग्रेस को आत्ममंथन की स्थिति में ला दिया है।

 

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