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प्रदेश के हितों से कभी समझौता नहीं करूंगा, हर वैध अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री सुक्खू

Himgiri Samachar:

शिमला, 05 अगस्त। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि उनकी सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर मजबूती से लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हितों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों में सरकार लगातार प्रभावी पैरवी कर रही है और कई मामलों में सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कभी भी प्रदेश के हितों से समझौता नहीं करेंगे और हिमाचल के लोगों का अधिकार दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

मुख्यमंत्री ने बुधवार को शिमला में कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े मामलों में हिमाचल का लगभग 4,200 करोड़ रुपये का वित्तीय बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का अधिकार अभी भी लंबित है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला वर्षों पहले हिमाचल के पक्ष में आने के बाद भी राज्य को उसका पूरा हक नहीं मिला है। सरकार इस मामले को लगातार उठा रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल के 7.19 प्रतिशत हिस्से की मांग भी मजबूती से रखी जा रही है। इसके साथ ही शानन जलविद्युत परियोजना का मामला भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी परियोजना हिमाचल को नहीं सौंपी गई है और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में प्रभावी पैरवी कर प्रदेश के पक्ष में फैसला हासिल किया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह संपत्ति फिर से राज्य सरकार के नियंत्रण में आ गई। सरकार ने 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अब इस संपत्ति से प्रदेश को हर वर्ष 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में भी राज्य को बड़ी सफलता मिली है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत हो गई है, जिससे हिमाचल को हर साल लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में भी राज्य सरकार ने हिमाचल के हितों की रक्षा की है।

 

उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये स्वीकार करने पर सहमति दी थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने जल घटक से लाभ लेने वाले राज्यों द्वारा हिमाचल के हिस्से की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति दी है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के संसाधनों पर हिमाचल के वैध अधिकार सुनिश्चित करने के लिए आगे भी पूरी मजबूती के साथ काम करती रहेगी।

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