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विकसित भारत के लाभार्थी देश के युवा, दिमागी नक्सलियों से रहे सावधान : प्रधानमंत्री

Himgiri Samachar:

नई दिल्ली, 15 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विकास को रफ्तार देने का आह्वान किया। उन्होंने इसके लिए सप्तशक्ति को बढ़ाने पर जोर दिया। सप्तशक्ति में उत्पादन, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और नवाचार, गति शक्ति, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, हरित अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि देश के युवाओं को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ना जरूरी है।

 

राष्ट्र आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संबोधन में सपनों को संकल्प, संकल्प को सामर्थ्य और सामर्थ्य को सफलता में बदलने की बात कही।

 

करीब सवा घंटे के भाषण में प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में सरकार की ओर से हासिल उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके परिणामस्वरूप ही देश पश्चिम एशिया जैसे संकट के दौरान भी मजबूत बना रहा । उन्होंने कहा कि आज दुनिया वैश्वीकरण के मोहजाल से बाहर निकलकर आपूर्ति श्रृंखला को हथियार बना रही है। ऐसे में देश का आत्मनिर्भर बनना और भी आवश्यक हो जाता है। इसी दिशा में तेल और खनिज भंडारों की खोज के लिए सरकार ने 85 हजार करोड़ रुपये के साथ ‘समुद्र मंथन’ योजना की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि सोच की दरिद्रता के कारण ही अब तक समुद्र के 99 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज खोज पर विचार ही नहीं किया गया था।

 

उन्होंने कहा, “सस्ता और आसानी से उपलब्ध विदेशी सामान तत्काल सुविधा दे सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प जरूरी है।”

 

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट के समय कुछ लोग देश को डराने में आनंद ले रहे थे, लेकिन देश ने देख लिया कि पिछले 10 से 12 वर्षों की सुविचारित योजनाएं काम आ रही हैं। इसी के चलते देश पेट्रोल, डीजल और यूरिया की कमी के संकट से बच रहा। उन्होंने कहा कि दुनिया में यूरिया की कीमत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंचने के बावजूद भारतीय किसानों को यह 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा, “वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, कुछ भी नहीं होने वाला… वेस्ट एशिया का क्राइसिस आया, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा... दुनिया भर की अफवाहें फैला कर भारत के लोगों को भयभीत करने का, डराने का, चिंता के अंदर डुबो देने का, कुछ लोगों को आनंद आ रहा था।लेकिन देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं। और इतने बड़े संकट के बावजूद भी 'नागरिक देवो भव' के मंत्र को लेकर भारत ने जो तैयारियां की थीं, एक के बाद एक कदम उठाए थे, संकट के समय में यह सारी चीजें काम आ गईं और आज देश में गैस भी है, पेट्रोल भी है, यूरिया भी है।”

 

प्रधानमंत्री ने युवाओं को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य का सबसे बड़ा लाभार्थी माना और कहा कि उन्हें इस लक्ष्य से जोड़ना बेहद जरूरी है।

 

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों विशेषकर युवाओं को दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहे ये दिमागी नक्सली अब मौके की तलाश में हैं और अराजकता के नए रास्ते खोज रहे हैं। ये लोग समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को हत्यारी नक्सलियो को समाप्त करने में सफलता मिली है, अब दिमागी नक्सलियों को पहचानकर अलग-थलग करने की आवश्यकता है।

 

उन्होंने कहा, “2014 में आपने जब हमें मौका दिया, उसी दिन हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा में आखिरी सांस की भी ताकत नहीं रही। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं, वे हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए, भांति-भांति के दांव खेल रहे हैं, इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा।”

 

मोदी ने सरकार की ओर से कुछ घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि देश एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का प्रशिक्षण देगा। 2036 के ओलंपिक की तैयारी के लिए जिन खेलों में भारत की प्रतिभागिता नहीं है, उनमें पांच से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रतिभा खोज कार्यक्रम चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत से परिवारों को बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग पर बड़ा खर्च करना पड़ता है। भारत अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन कोचिंग कक्षाओं का पूरा बुनियादी ढांचा तैयार कर बच्चों को कोचिंग देगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नागरिकों को नागरिक सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े विधेयक को पारित कराने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना समय की मांग है और सभी दलों को महिलाओं के सम्मान तथा उनके अधिकार के लिए आगे आना चाहिए।

 

मोदी ने युवाओं से जनगणना में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं है, बल्कि इन्हीं जानकारियों के आधार पर नीतियां, योजनाएं और देश के विकास की रूपरेखा तैयार होती है। इसलिए सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। तकनीक की उपलब्धता के कारण नागरिक स्वयं मोबाइल फोन से जनगणना संबंधी जानकारी भर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर पहले जानकारी जांचने और उसके बाद उसे डिजिटल माध्यम से दर्ज करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि सही जानकारी से सरकारी योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का वैश्विक प्रोफाइल लगातार मजबूत हो रहा है। स्थिर राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्याय व्यवस्था और संविधान भारत की ताकत हैं। दुनिया अब इन क्षमताओं को पहचान रही है। 2014 के बाद करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में बढ़ना इसी बदलती वैश्विक स्थिति का संकेत है।

 

मोदी ने मुक्त व्यापार समझौतों को भारतीय उद्योग और विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय वस्त्र, मशीनरी, दवाइयां और अन्य उत्पाद विश्व बाजार तक पहुंचने चाहिए। इसके लिए भारतीय उत्पादों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमत के साथ बाजार में उतरना होगा।

 

उन्होंनेे कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए कार्य संस्कृति, सोच और काम की गति में बदलाव आवश्यक है। पिछले पांच-सात दशकों में जो कार्य पूरे नहीं हो सके, उन्हें आने वाले पांच-सात वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने युवा, महिलाएं, किसान और मजदूरों की शक्ति पर भरोसा जताते हुए सुधारों की गति तेज करने का आह्वान किया।

 

प्रधानमंत्री ने भारत की कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाने का लक्ष्य रखने को कहा। उन्होंने अगले दशक में फॉर्च्यून 500 में भारत की 50 कंपनियां होने, दुनिया की शीर्ष पांच बैंकों में भारतीय बैंक के शामिल होने और शीर्ष फार्मा कंपनियों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी का लक्ष्य रखने का आह्वान किया। वैश्विक कानून, परामर्श और लेखांकन कंपनियों में भी भारतीय नेतृत्व की जरूरत बताई।

 

उन्होंने कहा कि सुधार सरकार के लिए मजबूरी या बोझ नहीं हैं, बल्कि विश्वास का विषय हैं। इसी विश्वास के साथ भारत सुधारों की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज, उद्योग और किसान समेत सभी वर्गों को अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं, सोच और लक्ष्यों में सुधार करना होगा, ताकि विकसित भारत के अनुरूप नई व्यवस्था तैयार की जा सके।

 

मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चिप और डेटा केंद्रों के विस्तार के साथ ऊर्जा की आवश्यकता तेजी से बढ़ेगी। ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा को महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्होंने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा। उन्होंने बताया कि इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू किए जाएंगे।

 

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हर दिल वंदे मातरम् से गूंज रहा है और हर घर, हर मन तिरंगे से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने में देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश उनके दुख-दर्द को समझता है और पीड़ित परिवारों को विश्वास दिलाया कि सरकार तथा पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

 

उन्होंनेे विकसित भारत के लिए सात शक्तियों की धारा का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच-सात वर्षों में उन कार्यों को पूरा करने के लिए इन सात शक्तियों का उपयोग किया जाएगा, जो पिछले कई दशकों में नहीं हो सके। इन शक्तियों के माध्यम से युवा सामर्थ्य को भी राष्ट्र निर्माण से जोड़कर देश को नई गति और ऊंचाई देने का लक्ष्य रखा गया।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को छोटे-छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पाद तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करनी होगी। डिजाइन से निर्माण तक भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का भरोसेमंद केंद्र बनना होगा। लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा। उन्होंने उद्यमियों और एमएसएमई से वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता और गुणवत्ता के आधार पर पहचान बनाने का आह्वान किया।

 

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों के बाद भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजार खुल रहे हैं। खेत से निर्यात बाजार तक पहुंच बनाने की आवश्यकता है। मिलेट्स, मसाले, फल, फूल और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाने तथा रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

 

प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा केंद्रों को उभरते अवसरों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल वैश्विक बाजार नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र बनना है। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सफलता के बाद अगली पीढ़ी की संचार तकनीक में नेतृत्व और भारत में विकसित 6जी को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया।

 

मोदी ने तेज और निर्बाध संपर्क व्यवस्था पर जोर दिया। शहरों को उच्च गति रेल से जोड़ने, आधुनिक राजमार्ग, अंतर्देशीय जलमार्ग, हवाई अड्डे और बहु-माध्यम परिवहन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई। बंदरगाहों को केवल माल चढ़ाने-उतारने के केंद्र के बजाय बंदरगाह आधारित विकास और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब भारत की आवश्यकता बन चुकी है। भारत को नई पीढ़ी की रक्षा तकनीक विकसित कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणाली और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक में नेतृत्व करना चाहिए और साइबर सुरक्षा को महत्वपूर्ण क्षेत्र के तौर पर विकसित करना चाहिए।

 

उन्होंने ने हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित गतिशीलता और हरित विनिर्माण में वैश्विक स्तर हासिल करने का आह्वान किया। साथ ही भारत की लंबी समुद्री सीमा को नीली अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बताते हुए मत्स्य, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक में विस्तार की संभावनाओं पर जोर दिया।

 

प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य, आस्था के केंद्र, हस्तशिल्प, संस्कृति, फिल्म, दृश्य प्रभाव, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल सामग्री को वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बनाने का माध्यम बताया। साथ ही रचनात्मक अर्थव्यवस्था को वैश्विक सामर्थ्य में बदलने और भारत की सांस्कृतिक ताकत को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन और वैश्विक आयोजनों की अपार्ट संभावनाएं हैं। उनका कहना था कि भारत की सॉफ्ट पावर के माध्यम से वैश्विक पर्यटकों, कलाकारों और आयोजनों को देश से जोड़ा जा सकता है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत देश में ढाई लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हो चुके हैं। युवाओं को रोजगार देने के साथ नए अवसर पैदा करने की दिशा में स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार द्वारा एक लाख करोड़ रुपये के नवाचार कोष की घोषणा का उल्लेख करते हुए युवाओं को संसाधनों की कमी न होने का भरोसा दिया गया।

 

प्रधानमंत्री ने कौशल भारत, डिजिटल भारत, अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने, राष्ट्रीय ड्रोन नीति और खेलो इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख किया। नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले की तुलना में विश्वविद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 से पहले देश में करीब 400 मेडिकल सीटें थीं, जबकि अब यह संख्या करीब 850 तक पहुंच गई है। विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने और उनकी डिग्री भारत में उपलब्ध होने की व्यवस्था को भी युवाओं के लिए नया अवसर बताया गया।

 

मोदी ने बच्चों में तकनीक और नवाचार की रुचि बढ़ाने के लिए अटल टिंकरिंग लैब का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 10 हजार से अधिक ऐसी प्रयोगशालाएं बच्चों को उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि छोटी उम्र से ही उनमें तकनीकी सोच, प्रयोग और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित हो सके। उन्होंने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों ने कम उम्र में उपग्रह और रॉकेट प्रक्षेपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और युवा प्रतिभा के लिए नए अवसर खुलने की बात कही गई।

 

प्रधानमंत्री ने जैव अर्थव्यवस्था में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले करीब 60 हजार करोड़ रुपये का कारोबार था, जो अब बढ़कर करीब 20 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसे स्पष्ट नीतियों और युवाओं की क्षमता का परिणाम बताते हुए जैव अर्थव्यवस्था को नए अवसरों वाला क्षेत्र बताया गया।

 

उन्होंने युवाओं के सामने नशे को बड़ी चुनौती बताया और नशा मुक्त भारत को सामूहिक जिम्मेदारी कहा। माय भारत के स्वयंसेवकों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों और आध्यात्मिक नेतृत्व के सहयोग से 100 सप्ताह का अभियान चलाने की जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक परिवार से इस अभियान से जुड़ने और युवाओं के सुरक्षित भविष्य में योगदान देने का आह्वान किया।

 

प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. बीआर आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले समेत विभिन्न महान व्यक्तित्वों के सपनों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रहित और कर्तव्य को पहचान बनाना चाहिए।

 

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई और कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। भारत कभी दुनिया के कमजोर माने जाने वाले देशों के समूह में गिना जाता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने तेज आर्थिक प्रगति की है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के साथ सामान्य नागरिकों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। नल से जल कनेक्शन देने की गति, गैस कनेक्शन, गरीबों के लिए शौचालय और आवास निर्माण में तेजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने बुनियादी सुविधाओं को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का काम किया है।

 

उन्होंने शासन में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों अनुपालन समाप्त किए गए और सैकड़ों पुराने कानून खत्म किए गए। उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी के कानूनों के सहारे 21वीं सदी की प्रगति संभव नहीं है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार को भी इसी बदलाव का हिस्सा बताया।

 

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को आधुनिक डिजिटल और तकनीकी दुनिया की अनिवार्य आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, चिकित्सा उपकरणों और परिवहन समेत अनेक क्षेत्रों में चिप की जरूरत है। भारत में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने और उत्पादन के निर्यात की जानकारी देते हुए आने वाले वर्षों में कई और संयंत्र शुरू होने की बात कही।

 

उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को आधुनिक तकनीक के लिए आवश्यक बताते हुए भारत की रणनीति का उल्लेख किया। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज पहल और महत्वपूर्ण खनिज गलियारे की घोषणा के साथ विभिन्न देशों से समझौते किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देश अब महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत पर भरोसा करने लगे हैं।

 

मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों की रफ्तार का उल्लेख किया। पाइप से गैस की सुविधा वाले शहरों की संख्या 70 से बढ़कर 700 और पाइप से गैस पाने वाले घरों की संख्या करीब दो करोड़ तक पहुंचने की बात कही। सौर ऊर्जा क्षमता दो गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट होने का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन का लाभ सामान्य परिवार और मध्यम वर्ग तक पहुंचाने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई। इसके तहत 50 लाख घरों में सौर ऊर्जा का काम पूरा होने की जानकारी दी।

 

प्रधानमंत्री ने रेलवे विद्युतीकरण की गति में बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1925 से शुरू हुए काम के 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था, जबकि पिछले दशक में शेष 70 प्रतिशत काम पूरा किया गया। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली ट्रेन शुरू होने को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

 

मोदी ने राज्यों और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से भी सुधारों की गति बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योग तथा समाज को मिलकर आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि 2009-10 में करीब डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या करीब 25 लाख पहुंच गई। विमानन क्षेत्र में नए हवाई अड्डों, मार्गों और रोजगार के अवसरों का उल्लेख किया। विमान रखरखाव और मरम्मत तथा भारत में निर्मित रक्षा परिवहन विमान को भी नई संभावनाओं से जोड़ा।

 

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