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प्रौद्योगिकी करुणा और ईमानदारी की जगह कभी नहीं ले सकती : राष्ट्रपति

Himgiri Samachar:

नागपुर, 15 अप्रैल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, यह संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का माध्यम है। डॉक्टर केवल बीमारियों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि मरीजों के मन में आशा भी जगाते हैं। नतीजतन आधुनिक प्रौद्योगिकी चाहे जितनी तरक्की कर ले वह कभी करूणा, ईमानदारी और संवेदनशीलता की जगह नहीं ले सकती।

 

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा दिया गया परामर्श न केवल मरीजों को, बल्कि उनके परिवारजनों को भी मानसिक बल प्रदान करता है। कई बार डॉक्टरों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी उन्हें हर स्थिति में मरीजों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील बने रहना चाहिए। साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों को भी चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।

 

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य जितना उनके व्यक्तिगत कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही राष्ट्र की प्रगति के लिए भी आवश्यक है। स्वस्थ नागरिक ही राष्ट्र निर्माण में अपनी पूर्ण क्षमता से योगदान दे सकते हैं। इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से न केवल बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी बढ़े हैं। एम्स नागपुर ने स्थापना के कुछ ही वर्षों में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं और उन्नत अनुसंधान के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की खाई को पाटने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों को उच्च स्थान प्राप्त है और लोग उन पर विश्वास करते हैं इसलिए मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना डॉक्टरों का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है। इस कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करके वे न केवल अपनी, बल्कि पूरे चिकित्सा पेशे की प्रतिष्ठा को और ऊंचा कर सकते हैं।

 

राष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों को जीवनभर सीखते रहने और नवाचार तथा अनुसंधान को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान कभी नहीं ले सकती। उन्होंने डॉक्टरों से हमेशा मानवीय मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग भाग्यशाली हैं कि उन्हें मानवता की सेवा का एक अनूठा अवसर मिला है। उन्हें इस जिम्मेदारी को गर्व और संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पास होने वाले विद्यार्थी न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि देशवासियों को स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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