शिमला, 15 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश आज बुधवार को अपना 78वां स्थापना दिवस उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। इस वर्ष राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह जनजातीय जिला किन्नौर के मुख्यालय रिकांगपिओ में आयोजित किया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सुबह 11 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराकर समारोह का शुभारंभ करेंगे और परेड का निरीक्षण करने के साथ मार्च पास्ट की सलामी लेंगे। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर जिला स्तरीय समारोह में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण करेंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भी समारोह आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे पूरे हिमाचल में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।
पीएम मोदी ने दी हिमाचलवासियों को शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि देवभूमि हिमाचल अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश के सभी परिवारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए हिमाचल के निरंतर विकास की सराहना भी की।
30 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर हुई थी हिमाचल की शुरुआत
हिमाचल प्रदेश का गठन 15 अप्रैल 1948 को 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों को मिलाकर किया गया था। शुरुआत में इसे मुख्य आयुक्त प्रदेश का दर्जा मिला। इसके बाद वर्ष 1950 में इसे पार्ट-सी राज्य बनाया गया और 1956 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। लंबी प्रशासनिक यात्रा के बाद 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह ऐतिहासिक सफर आज भी प्रदेश की पहचान का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
प्रति व्यक्ति आय में राष्ट्रीय औसत से आगे निकला हिमाचल
आज हिमाचल प्रदेश विकास के कई पैमानों पर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 2,83,626 रुपये आंकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब 64 हजार रुपये अधिक है। यह आंकड़ा पड़ोसी राज्य पंजाब की प्रति व्यक्ति आय 2,21,197 रुपये से भी ज्यादा है। वर्ष 1971 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय केवल 651 रुपये थी, जो आज बढ़कर 2.83 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। पिछले एक वर्ष में ही इसमें लगभग 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत आंकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
सेब उत्पादन और बागवानी ने बदली प्रदेश की आर्थिक तस्वीर
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी, विशेषकर सेब उत्पादन, की अहम भूमिका रही है। प्रदेश में करीब चार लाख परिवार बागवानी से जुड़े हुए हैं और सालाना लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का सेब कारोबार होता है। वर्ष 1950-51 में सेब का क्षेत्रफल केवल 400 हेक्टेयर था, जो बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1,16,338 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। ऊपरी शिमला का क्यारी गांव वर्ष 1982 में एशिया का सबसे समृद्ध गांव घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2016 में मड़ावग गांव ने भी यह गौरव हासिल किया। वर्तमान में मड़ावग गांव में सालाना 150 करोड़ रुपये से अधिक का सेब उत्पादन होता है।
उद्योग, पर्यटन और सड़कों के विस्तार से बढ़ी विकास की रफ्तार
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्र का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है। सोलन जिला औद्योगिक गतिविधियों और एशिया के प्रमुख फार्मा हब के रूप में उभरकर सामने आया है, जिससे यहां की प्रति व्यक्ति आय प्रदेश में सबसे अधिक है। कृषि और संबद्ध क्षेत्र का सकल बिक्री मूल्य भी वर्ष 2021-22 के 22,428 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 32,415 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पर्यटन के क्षेत्र में भी हिमाचल लगातार आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और शांत वातावरण के कारण हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पिछले वर्ष करीब डेढ़ करोड़ सैलानियों ने हिमाचल की वादियों का रुख किया। सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार तथा फोरलेन परियोजनाओं के निर्माण से भी प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज हुई है।