शिमला, 31 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है और अगले दो दिनों तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विभाग ने साफ कहा है कि रेड अलर्ट वाले जिलों में लोग बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें, नदियों-नालों और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूरी बनाए रखें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। राज्य भर में भूस्खलन से 4 नेशनल हाइवे व 662 सड़कों पर आवागमन ठप हो गया है।
मौसम विभाग के अनुसार एक सितंबर को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में बहुत भारी वर्षा का रेड अलर्ट रहेगा। इन जिलों में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। शिमला, कुल्लु, चम्बा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में इस दिन भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट रहेगा।
दो सितंबर को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में फिर से रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने साफ कहा है कि यहां अत्यधिक भारी वर्षा से भूस्खलन और नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा है। इस दिन शेष अधिकांश जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी रहेगा।
तीन सितंबर को शिमला और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा जबकि बाकी जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। चार से छह सितंबर तक भी पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है और किसी भी जिले के लिए कोई अलर्ट नहीं दिया गया है।
मौसम विभाग ने कहा है कि इन दो दिनों के दौरान पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। निचले जिलों में अचानक बाढ़ और जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए लोग सतर्क रहें, मौसम की जानकारी पर नजर बनाए रखें और सुरक्षित स्थानों पर ही ठहरें।
इस बीच लगातार हो रही भारी बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। रविवार दिन भर राजधानी शिमला सहित कई जिलों में जोरदार वर्षा हुई, जिससे जगह-जगह भूस्खलन हुआ। ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला में सोमवार 1 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया है। कुल्लु जिला के भी कई उपमंडलों में सोमवार को शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में अब तक चार नेशनल हाईवे और 662 सड़कें बंद हो चुकी हैं। अकेले चंबा में 253, मंडी में 203, कुल्लू में 175, कांगड़ा में 61, शिमला में 69, सोलन में 30 औऱ ऊना में 22 सड़कें बंद हैं। कुल्लू के दो और मंडी व सिरमौर के एक-एक नेशनल हाईवे पूरी तरह ठप हैं।
भारी बारिश के चलते बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है। प्रदेश में 985 ट्रांसफार्मर और 495 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं। कुल्लू में 332, चंबा में 296 और मंडी में 173 ट्रांसफार्मर बंद हैं, जबकि कांगड़ा, मंडी, शिमला और अन्य जिलों में पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में बिलासपुर जिले मलरान में 90 मिलीमीटर, नैना देवी में 82 मिलीमीटर और भटियात में 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस मानसून सीजन में अब तक 320 लोगों की मौत हो चुकी है। मंडी में 51, कांगड़ा में 49 और चंबा में 36 लोगों की जान गई है। अब तक 4098 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें से 844 पूरी तरह ढह गए हैं। अकेले मंडी जिले में 1592 मकानों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 471 दुकानें और 3710 पशुशालाएं भी तबाह हो चुकी हैं। अब तक 3056 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 1707 करोड़, जलशक्ति विभाग को 1070 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 139 करोड़ रुपये की क्षति उठानी पड़ी है। मॉनसून सीजन में परदेस में अब तक बादल फटने की 45, भूस्खलन की 95 और फ्लैश फ्लड की 91 घटनाएं हो चुकी हैं।