शिमला, 30 जनवरी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में दो घंटे का उपवास रखा। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी की सोच के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि देशभर में शहीदी दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर शिमला के रिज मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, मंत्री, विधायक और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा से जुड़े केंद्र सरकार के फैसलों के विरोध में उपवास शुरू किया।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि महात्मा गांधी के नाम पर शुरू की गई मनरेगा योजना से उनका नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस योजना को धीरे-धीरे कमजोर करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत पूरी राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब राज्यों को 10 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ रहा है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। वहीं, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के लिए जीवनरेखा है। इसके स्वरूप में बदलाव से गांवों में रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मनरेगा को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध करती रहेगी।
हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भी मनरेगा के नाम में बदलाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला महात्मा गांधी के विचारों के खिलाफ है और इससे ग्रामीण भारत को नुकसान होगा। उन्होंने यूरोपियन यूनियन के साथ हुए समझौते के बाद हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को संभावित नुकसान का मुद्दा भी उठाया और केंद्र सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा और किसानों-बागवानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उपवास में शामिल नेताओं ने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी के आदर्शों और जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।