शिमला, 25 जनवरी । हिमाचल प्रदेश के 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस के मौके पर रविवार को कांगड़ा जिले की जसवां–प्रागपुर विधानसभा के प्रागपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पेंशनरों, प्रशासनिक ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। हालांकि, कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर इस मंच से कोई घोषणा नहीं की गई, जिस पर कर्मचारी संगठनों की निगाहें टिकी रहीं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला प्रागपुर के खेल मैदान में सुबह 11 बजे शुरू हुए समारोह में मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने पुलिस, होमगार्ड और एनसीसी की टुकड़ियों की भव्य परेड का निरीक्षण किया, राष्ट्रीय ध्वज फहराया और मार्च पास्ट की सलामी ली। समारोह देशभक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया।मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने संबोधन में 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि इस वर्ग का लंबित पूरा एरियर 31 जनवरी से पहले जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार लगभग 90 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक इस निर्णय का उद्देश्य बुजुर्ग पेंशनरों को वित्तीय राहत देना और उन्हें किसी तरह की परेशानी से बचाना है।प्रशासनिक और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री ने जसवां–प्रागपुर क्षेत्र को दो अहम सौगातें भी दीं। उन्होंने प्रागपुर में उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय खोलने की घोषणा की, जिससे स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही नलसूहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्थापित करने का ऐलान किया गया। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से क्षेत्र में सरकारी सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में हाल के वर्षों में दो बार भीषण आपदाएं आईं, लेकिन विपक्ष केंद्र सरकार से पर्याप्त सहायता दिलाने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत, मुआवजा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई। सुक्खू ने यह भी दोहराया कि आपदा प्रबंधन को सरकार की प्राथमिकताओं में रखा गया है।नशे के खिलाफ अभियान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। उनके मुताबिक, नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने नशे को हिमाचल के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सिरमौर जिले में एक विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित किया जा रहा है। साथ ही ‘समृद्ध हिमाचल विज़न डॉक्यूमेंट’ के जरिए राज्य के संतुलित विकास की दिशा तय की गई है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों को प्राथमिकता दी गई है।हालांकि, जहां पेंशनरों के एरियर और क्षेत्रीय विकास को लेकर घोषणाएं चर्चा में रहीं, वहीं कर्मचारियों के लिए लंबे समय से लंबित 13 प्रतिशत डीए पर कोई ऐलान न होने से निराशा भी देखने को मिली। कर्मचारी संगठन पहले से ही इस मुद्दे को लेकर सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं और पूर्ण राज्यत्व दिवस जैसे बड़े मंच से घोषणा की उम्मीद लगाए बैठे थे।