शिमला, 29 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के संजौली से भट्टाकुफर तक सुरंग के निर्माण से जुड़े मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि जब छकरेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर सतही सड़क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी और करीब 600 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में बांटे गए थे, तो उस योजना को छोड़कर घनी आबादी वाली पहाड़ी के नीचे सुरंग बनाने का निर्णय क्यों लिया गया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
संजौली के निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सुरंग निर्माण का काम तुरंत बंद करवाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया, जिससे सुरंग के ऊपर स्थित मकानों को खतरा पैदा हो गया है। उनके अनुसार, निर्माण के दौरान कई मकानों में दरारें आई हैं और उनके घरों को भी हाल ही में असुरक्षित घोषित किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि शिमला बाईपास परियोजना की मूल योजना के अनुसार छकरेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर सतही राजमार्ग बनाया जाना था। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया और करीब 600 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में बांटे गए। इस प्रक्रिया में करीब 88 परिवारों के मकान तोड़े गए और वे विस्थापित हुए। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बाद में सतही सड़क की योजना छोड़कर चलाई, संजौली से भट्टाकुफर तक जुड़वां सुरंग बनाने का प्रस्ताव अपनाया गया।
अदालत में पेश दस्तावेजों, तस्वीरों और नक्शों के अनुसार सुरंग उस पहाड़ी के नीचे बनाई जा रही है, जिसके ऊपर सैकड़ों मकान बने हुए हैं। याचिकाकर्ताओं ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस पहाड़ी के नीचे सुरंग बनाने को लेकर सुरक्षा संबंधी परामर्श दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार कब्रिस्तान और विशाल मेगा मार्ट के आसपास कुछ स्थानों पर सुरंग और ऊपर की सतह के बीच की दूरी केवल 14 मीटर है। सुरंग के दोनों ओर से पानी निकलने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद उपायुक्त शिमला और एनएचएआई के अधिकारियों ने मौके का दौरा किया था। इस दौरान ब्लास्टिंग का काम रोकने के निर्देश दिए गए। आईआईटी रुड़की की तकनीकी टीम ने भी एक अक्टूबर, 2026 को मौके का दौरा किया और सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता जताई। एनएचएआई की ओर से अदालत को बताया गया कि सुरंग का निर्माण कार्य 18 सितंबर से बंद है। आईआईटी रुड़की ने निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड मंगवाया है। एनएचएआई ने आश्वासन दिया कि आईआईटी की रिपोर्ट आने और मकानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए जाने तक काम दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने इस आश्वासन के बाद निर्माण पर रोक लगाने का अलग से अंतरिम आदेश जारी नहीं किया, लेकिन उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई तक सुरंग निर्माण से संबंधित कोई गतिविधि नहीं होगी। अदालत ने एनएचएआई से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि सतही सड़क के लिए दिए गए करीब 600 करोड़ रुपये के मुआवजे पर सरकारी खजाने को हुए खर्च की भरपाई कौन करेगा। एनएचएआई को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।