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भारत-स्विट्जरलैंड के बीच परिवहन, गतिशीलता और अनुसंधान से जुड़े करार

Himgiri Samachar:

नई दिल्ली, 05 अक्टूबर। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सोमवार को परिवहन, गतिशीलता एवं अवसंरचना, प्रवासन एवं गतिशीलता तथा युवा पेशेवरों से संबंधित नए समझौते हुए। इनमें स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए संयुक्त अनुसंधान शामिल हैं। दोनों पक्षों ने शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थानों के सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।

 

दोनों देशों के बीच आज कुल पांच करार हुए। साथ ही दोनों देशों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित भारत-स्विट्जरलैंड अनुसंधान फ्लैगशिप कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की घोषणा की।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हैदराबाद हाउस में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पार्मेलिन के साथ व्यापक चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आज एक्स पर बताया कि भारत के निर्यात के लिए स्विट्जरलैंड में बाजार पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को और सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं। इससे भारत के कृषि, फार्मा, कपड़ा और इंजीनियरिंग उत्पादों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा और हम भारत के जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, बैंकिंग, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए स्विस निवेश को आकर्षित करेंगे। इन पहलों के साथ, हम मिलकर पूरी दुनिया के लिए भरोसेमंद आपूर्ति शृंखलाएं और विश्वसनीय समाधान विकसित करेंगे।

 

दोनों नेताओं ने संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, नवाचार एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सैन्य आदान-प्रदान एवं रक्षा उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जन-जन संबंधों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौते द्वारा आर्थिक सहयोग में उत्पन्न सकारात्मक गति को सराहा और नवाचार-आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

 

साझा वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फरवरी में भारत ने विश्व का सबसे बड़ा एआई शिखर सम्मेलन आयोजित किया। अगले वर्ष स्विट्जरलैंड जिनेवा एआई शिखर सम्मेलन के माध्यम से इस यात्रा को आगे बढ़ाएगा। उन्हें विश्वास है कि हम सब मिलकर एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानवकेंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।

 

प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना जारी रखने का फैसला किया है। हम इस बात से भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता है।

 

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति पार्मेलिन ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग भी हमारे सहयोग का एक मजबूत स्तंभ है। उन्हें खुशी है कि हम जल्द ही स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने जा रहे हैं। भारतीय विज्ञान स्टार्टअप्स की क्षमता निर्माण के लिए, हम ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते का स्वागत करते हैं। योग और आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, हमने इन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए सकारात्मक चर्चा की। हमने सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन सहयोग के नए अवसरों की पहचान की। हमने परमाणु ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की। वाराणसी का रोपवे, नोएडा का जेवर हवाई अड्डा और पर्वतीय क्षेत्रों में रेलवे और सुरंग निर्माण परियोजनाएं हमारे अवसंरचना सहयोग के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

 

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