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एचपीयू में फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, एसएफआई ने फैसले को बताया ‘शिक्षा पर हमला’

Himgiri Samachar:
शिमला, 22 मई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ शुक्रवार को छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं और शोधार्थी विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में बढ़ाए गए विभिन्न शुल्कों को तुरंत वापस लेने की मांग की।


एसएफआई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, मरम्मत शुल्क और अन्य कई फीसों में भारी बढ़ोतरी की है। संगठन का कहना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि हिमाचल जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी किसान और मजदूर परिवारों से आते हैं, वहां इस तरह की फीस वृद्धि उच्च शिक्षा को गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की पहुंच से दूर कर सकती है।


एसएफआई सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी वित्तीय और प्रशासनिक विफलताओं का बोझ छात्रों पर डाल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय आर्थिक संकट की बात कर रहा है, तो पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पिछले वर्षों में संसाधनों और फंड का इस्तेमाल किस तरह किया गया।


एसएफआई ने यह भी कहा कि हालिया कैग रिपोर्ट में करीब 186 शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों में अनियमितताओं की बात सामने आई है। संगठन का आरोप है कि इन मामलों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय छात्रों से फीस बढ़ाकर पैसा वसूलने की कोशिश की जा रही है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण पैदा हुए संकट का बोझ विद्यार्थियों पर डालना गलत है।


संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि फीस वृद्धि जैसा बड़ा फैसला छात्रों और छात्र संगठनों से बातचीत किए बिना लागू किया गया। एसएफआई का कहना है कि एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय का उद्देश्य सस्ती और सुलभ शिक्षा देना होना चाहिए, न कि शिक्षा को महंगा बनाना।


प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने मांग की कि बढ़ाए गए सभी शुल्क तुरंत वापस लिए जाएं। साथ ही विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन और कैग रिपोर्ट में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को विश्वविद्यालय से बाहर राज्य स्तर तक बढ़ाया जाएगा।

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