शिमला, 02 फ़रवरी। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने साेमवार काे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि अपनी प्रशासनिक और वित्तीय नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने के बजाय उन्हें राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान दी गई झूठी गारंटियों को पूरा करना केंद्र का दायित्व नहीं है।
जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरे देश के लिए समान और दूरदर्शी नीतियां बना रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय बजट 2026-27 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के स्थान पर अब एक नई व्यापक योजना ‘विबी: जी राम जी’ (विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण) लागू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नई योजना के लिए केंद्र सरकार ने 95,692.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि मनरेगा के लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट रखा गया है। दोनों योजनाओं का संयुक्त बजट सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो अब तक का ऐतिहासिक आवंटन है। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं द्वारा मनरेगा बंद किए जाने का भ्रम फैलाया जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत लगभग 1.72 लाख कार्य लंबित हैं और 655 पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिल पाया। राज्य सरकार की ओर से अगस्त माह से मजदूरों को उनकी दिहाड़ी तक नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि ‘विबी: जी राम जी’ केवल मजदूरी योजना नहीं, बल्कि एक मिशन है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को 100 के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा और भुगतान की अवधि 15 दिन से घटाकर 7 दिन कर दी गई है। साथ ही केंद्र सरकार सामान्य राज्यों से 40 प्रतिशत और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों से मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ही लेगी।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल में केंद्र की लगभग 191 योजनाएं चल रही हैं, जिनमें राज्य को केवल 10 प्रतिशत योगदान देना है, लेकिन कुप्रबंधन और राजनीतिक कारणों से सुक्खू सरकार यह न्यूनतम हिस्सेदारी भी समय पर नहीं दे पा रही, जिसका सीधा नुकसान प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है।