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16वें वित्त आयोग से हिमाचल को सालाना 10 हजार करोड़ का नुकसान: मुकेश अग्निहोत्री

Himgiri Samachar:

शिमला, 02 फ़रवरी। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार के बजट और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि इन फैसलों से हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान होगा। उनके मुताबिक यह प्रदेश की आर्थिक सेहत को कमजोर करने वाला दीर्घकालिक संकट है।

 

उप-मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा कि जीएसटी व्यवस्था पहले ही हिमाचल जैसे पर्वतीय और सीमित संसाधनों वाले राज्यों के लिए नुकसानदेह साबित हुई है। जीएसटी क्षतिपूर्ति समाप्त होने से प्रदेश को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त कर केंद्र सरकार ने दूसरा गंभीर आघात दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह फैसला हिमाचल के हितों के खिलाफ है।

 

मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश का कुल बजट करीब 58 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें से बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य खर्चों में चला जाता है। ऐसे में केंद्रीय सहायता में कटौती का सीधा असर विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल को लगभग 38 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिले थे और मौजूदा हालात को देखते हुए यह उम्मीद थी कि यह राशि बढ़ेगी, लेकिन इसके उलट इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

 

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का गठन ही विशेष भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आर्थिक संसाधनों को ध्यान में रखकर किया गया था। उस समय यह राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया था कि केंद्र सरकार प्रदेश को विशेष वित्तीय सहायता देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र पर निर्भरता कमजोरी नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है और 1952 से लेकर अब तक इस परंपरा का पालन होता रहा है। राजस्व घाटा अनुदान उसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण आधार था।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि आरडीजी को समाप्त करना न केवल हिमाचल के साथ नीतिगत अन्याय है बल्कि यह संघीय ढांचे की भावना के भी खिलाफ है। बड़े राज्यों के पास अपने संसाधन हैं, जबकि इस फैसले से हिमाचल जैसे पर्वतीय और विशेष परिस्थितियों वाले राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

 

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