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हिमाचल की राज्यसभा सीट पर 16 मार्च को मतदान, दो साल पहले भाजपा ने दी थी पटखनी

Himgiri Samachar:

शिमला, 18 फ़रवरी। हिमाचल प्रदेश की एकमात्र खाली हो रही राज्यसभा सीट पर चुनाव की तारीख तय होते ही सियासत ने रफ्तार पकड़ ली है। भारत निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना कराने की घोषणा की है। हिमाचल से राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी का कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो रहा है। इसके चलते यह सीट रिक्त हो रही है।

 

निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के मुताबिक 26 फरवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 5 मार्च तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तय की गई है। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी।

 

हिमाचल विधानसभा में वर्तमान संख्या बल पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों की तादाद भाजपा से अधिक है। ऐसे में गणितीय आधार पर किसी कांग्रेस उम्मीदवार का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन प्रदेश की सियासत में दो साल पहले हुए राज्यसभा चुनाव की घटना अब भी ताजा है, जब कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग के कारण पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हर्ष महाजन जीतकर राज्यसभा पहुंचे थे। उस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था और सूक्खु सरकार तक पर असर पड़ा था। क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस के छह विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था।

 

इसी पृष्ठभूमि में इस बार का चुनाव भी दिलचस्प माना जा रहा है। कांग्रेस के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के नामों पर चर्चा चल रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी तक आधिकारिक रूप से किसी नाम की घोषणा नहीं की है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पहले अपने उम्मीदवार की घोषणा कर संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करेगी। इसके बाद भाजपा भी रणनीति के तहत अपना प्रत्याशी उतार सकती है। भाजपा के लिए यह चुनाव संख्या बल से ज्यादा राजनीतिक संदेश का चुनाव हो सकता है।

 

राज्यसभा का चुनाव भले ही प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता और इसमें केवल विधायक ही वोट डालते हैं, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कम नहीं होता। खासकर तब, जब अतीत में क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं सरकार और संगठन दोनों के लिए चुनौती बन चुकी हों।

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