नई दिल्ली, 16 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत के लिए राहत देने वाली खबर सामने आई है। खाड़ी देशों से एलपीजी लेकर भारतीय ध्वज वाला शिवालिक जहाज 45,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट बंदरगाह पहुंच गया है। दूसरा जहाज नंदा के भी जल्द आने के बाद देश में रसोई गैस की किल्लत कम होने के आसार हैं।
इजराइल और अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमले के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक 'शिवालिक' 45,000 टन एलपीजी लेकर सोमवार को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया है। युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकले इस जहाज से देशभर में चल रहा एलपीजी संकट दूर होने की उम्मीद है।
इससे पहले जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया था कि भारतीय ध्वज वाला एलपीजी वाहक शिवालिक आज शाम 5 बजे पहुंच जाएगा। कुमार ने कहा कि इसके आगमन से पहले मुद्रा बंदरगाह पर दस्तावेजीकरण, प्राथमिकता बर्थिंग और सब कुछ व्यवस्थित कर दिया गया है, ताकि माल के निर्वहन में कोई देरी न हो।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में कोई घटना सामने नहीं आई है और हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। हम प्रत्येक जहाज और उसके चालक दल के संपर्क में हैं। कुमार ने कहा कि 611 भारतीय नाविकों के साथ 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में बने हुए हैं।
होर्मुज जलमार्ग बंद होने के कारण एलपीजी से भरे जहाज वहां फंसे हुए थे। भारत सरकार के सफल कूटनीतिक प्रयासों से भारत के विदेश मंत्रालय और ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस मामले को लेकर बातचीत की थी। इसी के बाद से भारत के दो जहाज शिवालिक और नंदा को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी गई थी।