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राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा-बस्तर की संस्कृति प्राचीन, समृद्ध और "सबसे मीठी"

Himgiri Samachar:

रायपुर, 07 फ़रवरी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को जगदलपुर में कहा कि बस्तर की संस्कृति प्राचीन, समृद्ध और "सबसे मीठी" है। वे यहां लाल बाग मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पण्डुम 2026’ के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रही थीं।

 

राष्ट्रपति मुर्मु ने समारोह में मां दंतेश्वरी का जयकारा लगाकर अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने बस्तर की संस्कृति को प्राचीन, समृद्ध और "सबसे मीठी" बताते हुए वहां की परंपराओं और विरासत के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। इसके पहले उन्होंने सुबह 10.55 से 11.10 बजे तक वह बस्तर पण्डुम में लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन किया।

 

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (बस्तर) में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव 'बस्तर पंडुम-2026' का भव्य शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने बस्तर की जीवंत परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा अपने घर आने जैसा सुखद अनुभव देता है। उन्होंने कहा कि बस्तर पडुंम को लोग उत्सव की तरह जीते हैं। यहां की सुंदरता और संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार दशक से नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासियों को नुकसान हुआ। लेकिन अब बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों का स्वागत करती हूं, जो लोग बरगला रहे हैं उनकी बातों में न आएं।

 

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम में उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मुझे मां दंतेश्वरी के क्षेत्र में आने का अवसर मिला। इसे मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं यहां पर आए लोगों का स्वागत करती हूं। मुझे लगता है कि 5 हजार से ज्यादा बच्चियों ने समारोह में हमारा स्वागत किया, उनकी मैं आभारी हूं। यहां की संस्कृति की भव्यता मुझे दिखाई देती है। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं तो मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां से जो मुझे स्नेह मिलता है, वो अनुपम हैं। ये वो धरती है जहां के वीरों ने अपने प्राण न्योछावर करके इसे बचाया है। बस्तर की देवी मां दंतेश्वरी ने इसे अपने हाथों से बनाया है। मुझे यहां का आतिथ्य और संस्कृति देखने को मिली।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे यहां के स्टॉल में पहले देवी देवता यहां की कला, संस्कृति, व्यंजन और अन्य चीजें देखने को मिलीं। भारत में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां संस्कृति की भव्यता है। छत्तीसगढ़ आदिवासी जनता से परिपूर्ण है। यह पुराना और बहुत मीठा है। यह सभी एक साथ उत्सव मनाने के लिए आगे आते हैं। मौसम बदलने के बाद पतझड़ होकर आम में फूल आता है, तब यहां पंडुम होता है। पिछले साल बस्तर पंडुम की झलक को देशभर के लोगों ने देखा है। इस साल 50 हजार से अधिक लोग जुड़े, जिसकी झलक आते ही मैंने देखी। इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं। गुफाएं और जलप्रपात बस्तर में सक्षम हैं।

 

उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र चार दशकों तक माओवादियों से प्रभावित रहा, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों और युवाओं को हुआ है। भारत सरकार के कारण अब बस्तर से असुरक्षा का वातावरण समाप्त हो रहा है। सरकार नियद नेल्लानार के जरिए हथियार छोड़ चुके लोगों को पुनर्वास का रास्ता दिखा रही है। आज बस्तर में विकास हो रहा है। बरसों से बंद विद्यालय खुल रहे हैं, बच्चे पढ़ रहे हैं, रोड बन रहे हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। संविधान में विश्वास करते हुए आप सरकार पर भरोसा करते हुए लोकतंत्र पर विश्वास रखें। इसे लोकतंत्र की ताकत ही कहेंगे कि ओडिशा के छोटे से गांव में रहने वाली महिला राष्ट्रपति बनकर आपको संबोधित कर रही हूं। बस्तर पंडुम से बस्तर के जनजातीय संस्कृति की झलक लोगों ने देखा है।

 

इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें ढोकरा आर्ट से बने कर्मा वृक्ष, कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया। इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री साय बस्तर पंडुम के शुभारंभ के बाद बस्तर के स्थानीय कलाकारों द्वारों लोक नृत्य की प्रस्तुतियां देखीं। बस्तर पंडुम कार्यक्रम में लगाए गए स्टॉल्स में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनजातीय औषधि का निरीक्षण किया।

 

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