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आईजीएमसी शिमला में पहली बार रोबोटिक तकनीक से कैंसर मरीज की सर्जरी सफल, कम खर्च में मिला इलाज

Himgiri Samachar:
शिमला, 23 मई। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए रोबोटिक तकनीक से बड़ी आंत के कैंसर से पीड़ित मरीज की सफल सर्जरी की है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यह हिमाचल प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें आंत के कैंसर की जटिल सर्जरी रोबोटिक असिस्टेड तकनीक के जरिए की गई है।


अस्पताल में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि 20 मई को मरीज का ऑपरेशन किया गया था। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर रही और अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।


अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताया कि बड़ी आंत के कैंसर की इस तरह की सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें संक्रमित हिस्से को निकालकर आंत को दोबारा जोड़ना पड़ता है। आम तौर पर निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों में इस तरह की रोबोटिक सर्जरी पर करीब साढ़े पांच से छह लाख रुपये तक खर्च आता है। लेकिन आईजीएमसी में मुख्यमंत्री द्वारा तय दरों के अनुसार यह सुविधा जनरल वार्ड के मरीजों को करीब 30 हजार रुपये और स्पेशल वार्ड के मरीजों को 50 हजार रुपये में उपलब्ध करवाई जा रही है।


अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव और सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शनिवार को बताया कि रोबोटिक सर्जरी में मरीज को पारंपरिक ऑपरेशन की तुलना में कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। छोटी सर्जरी के मामलों में मरीज को अगले दिन ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, जबकि कैंसर जैसी बड़ी सर्जरी के मरीज भी दो से तीन दिनों में सामान्य गतिविधियां शुरू करने लगते हैं।


डॉ. राहुल राव ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसी साल 11 मार्च को आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी तकनीक का उद्घाटन किया था। इसके बाद से अब तक अस्पताल में कुल 44 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें 38 सर्जरी सर्जरी विभाग और छह गायनी विभाग द्वारा की गई हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी आंत के कैंसर के इलाज में रोबोटिक तकनीक का यह पहला सफल प्रयोग हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नई तकनीक के जरिए प्रदेश के लोगों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के बड़े निजी अस्पतालों का रुख न करना पड़े।

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