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समिति प्रणाली लोकतंत्र में ‘मिनी सदन’ की अहम भूमिका : कुलदीप सिंह पठानिया

Himgiri Samachar:
जयपुर, 05 मई। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि समिति प्रणाली लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है और यह एक तरह से “मिनी सदन” की तरह काम करती है। उन्होंने बताया कि समितियों के जरिए किसी भी विषय पर विस्तार से चर्चा और बारीकी से जांच संभव होती है, जिससे सदन का समय भी बचता है और फैसले ज्यादा प्रभावी बनते हैं।

कुलदीप सिंह पठानिया मंगलवार को 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पीठासीन अधिकारियों की समिति की एक दिवसीय बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। यह लोकसभा द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की दूसरी बैठक थी। इस समिति के अध्यक्ष मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर हैं, जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सूरमा पाढ़ी और सिक्किम विधानसभा अध्यक्ष मिंगमा नोर्बू शेरपा इसके सदस्य हैं। बैठक में सभी सदस्य मौजूद रहे।


बैठक शुरू होने से पहले सभी सदस्यों ने राजस्थान विधानसभा परिसर में स्थित औषधीय पौधशाला और संग्रहालय का दौरा किया और वहां लगी प्रदर्शनियों को देखा। इसके बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।


अपने संबोधन में कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में समिति प्रणाली बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इससे संसद और विधानसभाओं का काम ज्यादा प्रभावी, विशेषज्ञता आधारित और जवाबदेह बनता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में विधेयकों की गहन जांच, सरकारी नीतियों की समीक्षा और सरकार की जवाबदेही तय करने में समितियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।


पठानिया ने सुझाव दिया कि समितियों की सिफारिशों को और मजबूत बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी समितियों की रिपोर्ट सिर्फ सलाह के रूप में होती है, लेकिन अगर सरकार के लिए यह जरूरी कर दिया जाए कि वह तय समय के भीतर इन सिफारिशों पर जवाब दे, तो इससे समितियों की उपयोगिता और बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से समितियों के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि कानून ज्यादा व्यवहारिक और जनहित में बन सकें।


उन्होंने समितियों को और सक्षम बनाने के लिए विशेषज्ञ सलाहकार, शोधकर्ता और डेटा विश्लेषकों की मदद उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, ताकि फैसले तथ्यों पर आधारित और बेहतर गुणवत्ता के हों। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यही था कि विधानमंडलों की समितियों को और ज्यादा प्रभावी और सशक्त कैसे बनाया जा सकता है।

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